गुरदासपुर के ठक्कर संधू में ₹3 लाख का 'जादुई' तालाब: सफाई के नाम पर पानी से ज्यादा गंदा हुआ सरकारी बजट!

पंजाब के गुरदासपुर जिले के गांव ठक्कर संधू में एक तालाब की सफाई के लिए ₹3 लाख खर्च किए गए, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। जानिए कैसे सरकारी फंड पानी में बह गया और ग्रामीण इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग क्यों कर रहे हैं।

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जनवार्ता लाइव

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गुरदासपुर।

पंजाब के गुरदासपुर जिले का गांव ठक्कर संधू इन दिनों चर्चा में है। चर्चा का विषय न तो कोई विकास कार्य है और न ही कोई ऐतिहासिक उपलब्धि, बल्कि गांव का वह तालाब है जो अब करोड़पति तो नहीं, पर लाखपति जरूर बन गया है। सुना है कि इस तालाब की कायापलट के लिए सरकारी खजाने से पूरे 3 लाख रुपए की भारी-भरकम राशि निकाली गई।

ग्रामीणों का कहना है कि सफाई के बाद भी तालाब की हालत ऐसी है कि मानों सफाई हुई ही न हो। स्थिति यह है कि तालाब आज भी अपनी पुरानी गंदगी को बेशर्मी से ओढ़े बैठा है। लोग मजाक में कह रहे हैं कि शायद यह ₹3 लाख तालाब की गंदगी को हटाने के लिए नहीं, बल्कि उसे आधुनिक रूप में सुरक्षित रखने के लिए खर्च किए गए हैं।

सवाल यह है कि आखिर ₹3 लाख गए तो गए कहाँ? क्या पानी में सोने की परत चढ़ाई गई थी? या फिर सफाई करने वाले मजदूरों ने अदृश्य मशीनों का उपयोग किया जो केवल कागजों पर ही चलती हैं?

ग्रामीण अब इस पूरे 'स्वच्छता घोटाले' की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि यदि इसकी सही से जांच हो जाए, तो ₹3 लाख की बर्बादी का 'सत्य' सतह पर आ जाएगा। फिलहाल, ठक्कर संधू का यह तालाब अपनी बदहाली के साथ-साथ भ्रष्टाचार की एक मूक गवाही बना हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस पर आंखें मूंदे रहता है या वास्तव में जांच की सफाई से इस तालाब का नसीब बदलता है।