बलिया DIOS ऑफिस में महाघोटाला: IGRS शिकायतों का बिना सुनवाई निस्तारण, प्रधान लिपिक ने बेटे को दी फर्जी नौकरी

बलिया DIOS मनोज कुमार मिश्रा के राज में IGRS शिकायतों का बिना सुनवाई निस्तारण जारी है। पूर्व DIOS रमेश सिंह द्वारा साक्ष्य छिपाने और प्रधान लिपिक दयानंद पाठक द्वारा बेटे की फर्जी नियुक्ति का बड़ा खुलासा। हाई कोर्ट की फटकार के बाद भी शिक्षा माफियाओं को बचाने का खेल। पढ़ें पूरी खबर।

बलिया DIOS ऑफिस में महाघोटाला: IGRS शिकायतों का बिना सुनवाई निस्तारण, प्रधान लिपिक ने बेटे को दी फर्जी नौकरी
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बलिया DIOS कार्यालय का 'गजब' इंसाफ: IGRS शिकायतों का हो रहा मनमाना 'कत्ल', DIOS मनोज कुमार मिश्रा के राज में बिना सुनवाई निस्तारित हो रही फाइलें

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बलिया।

जिले का जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय इन दिनों न्याय का नहीं, बल्कि शिक्षा माफियाओं के 'संरक्षण गृह' और शिकायतों के 'कब्रिस्तान' के रूप में तब्दील हो चुका है। उत्तर प्रदेश सरकार के IGRS (जनसुनवाई) पोर्टल को यहाँ किस तरह मज़ाक बना दिया गया है, इसकी ताज़ा मिसाल वर्तमान DIOS मनोज कुमार मिश्रा की कार्यप्रणाली है। भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े की गंभीर शिकायतों को बिना कोई जांच किए, मनमाने ढंग से निस्तारित किया जा रहा है। भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए DIOS मनोज कुमार मिश्रा ने एक रटा-रटाया और अचूक बहाना ढूँढ लिया है— "मामला न्यायालय में विचाराधीन है", और बस, इसी एक लाइन के सहारे IGRS पर आने वाली फाइलों का गला घोंटा जा रहा है।

सुनवाई के नाम पर दफ्तर में 'नौटंकी' और TET का झुनझुना

जब कोई शिकायतकर्ता न्याय की आस में दफ्तर पहुँचता है, तो वहां अलग ही स्तर की नौटंकी चल रही होती है। सुनवाई के लिए तय किए गए दिन DIOS साहब शाम 4:20 बजे ही अपने दफ्तर से ऐसे खिसक लेते हैं जैसे कोई आपातकाल आ गया हो। उनके पीठ फेरते ही उनके एसोसिएट ओमप्रकाश यादव मोर्चा संभालते हैं और फरियादी को यह कहकर टरकाते हैं, "आपका केस बड़ा पेचीदा है, जुलाई में TET परीक्षा के बाद कोई नई तिथि रख दी जाएगी।" इसके बाद महज खानापूर्ति के लिए फरियादी की हाजिरी दर्ज की जाती है, दिखावे के लिए तस्वीरें खींची जाती हैं, और न्याय मांगने वाले को बैरंग लौटा दिया जाता है।

पटल प्रभारी संजय यादव का 'जादू' और DIOS की मेहरबानी

इस पूरे फर्जीवाड़े के असली 'रिंगमास्टर' पटल प्रभारी संजय यादव हैं। संजय यादव फाइलों के पन्नों में जो जादूगरी करते हैं, वह किसी से छिपा नहीं है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि DIOS साहब इतने 'भोले' हैं या शायद इतने 'मेहरबान' कि वे फाइल खोलकर यह देखना भी उचित नहीं समझते कि अंदर क्या तथ्य दबाए गए हैं और किन दोषियों को मलाई चटाई जा रही है।

साक्ष्यों का 'कत्ल' और हाई कोर्ट का तमाचा

अगर DIOS कार्यालय के इन कर्ताधर्ताओं में रत्ती भर भी शर्म बची हो, तो उन्हें नितेश कुमार पांडेय और सिद्धार्थ कुमार की याचिकाओं पर आए उच्च न्यायालय के आदेश एक बार गौर से पढ़ लेने चाहिए। भ्रष्टाचार का संस्थागत गठजोड़ देखिए— पूर्व DIOS रमेश सिंह ने 21.02.2024 को जो निस्तारण आदेश पारित किया था, उसमें शिकायतकर्ता (पूर्व प्रधानाचार्य डॉ० हरेराम पाण्डेय) द्वारा प्रस्तुत किए गए पुख्ता साक्ष्यों और अभिलेखों को जानबूझकर गायब (गोपन) कर दिया गया! यह सब सिर्फ इसलिए किया गया ताकि याचीगणों (फर्जीवाड़ा करने वालों) को अनुचित लाभ पहुँचाया जा सके। अधिकारियों ने जिस दिन सुनवाई का नोटिस जारी किया, उसी दिन गुपचुप तरीके से एकतरफा आदेश भी पास कर दिया। अदालत ने इस फर्जी आदेश को खारिज कर इन 'साहबों' की कार्यप्रणाली की पोल खोल दी है।

महाघोटाला: प्रधान लिपिक ने फर्जीवाड़े से बेटे को ही दे दी नौकरी!

दरअसल, यह सारी बौखलाहट और IGRS की शिकायतों को ठिकाने लगाने का खेल बांसडीह इंटर कॉलेज के उस महाघोटाले को दबाने के लिए है, जहाँ 'अपनों' को रेवड़ियां बांटी गई हैं। अंधेरगर्दी की इंतहा देखिए— प्रधान लिपिक दयानंद पाठक ने प्रबंधक संजय कुमार सिंह और प्रभारी प्रधानाचार्य अनिल कुमार पाण्डेय के साथ मिलकर ऐसी बिसात बिछाई कि अपने ही बेटे सिद्धार्थ कुमार की सहायक लिपिक के पद पर फर्जी नियुक्ति करवा डाली!

इसके लिए पूर्व प्रधानाचार्य डॉ० हरेराम पाण्डेय के फर्जी हस्ताक्षर बनाए गए और सिद्धार्थ कुमार के साथ-साथ नितेश कुमार पांडेय समेत 5 परिचारकों की कूट रचित नियुक्तियां कर दी गईं। डॉ० हरेराम पाण्डेय लगातार साक्ष्यों के साथ IGRS पर गुहार लगा रहे हैं, लेकिन DIOS मनोज कुमार मिश्रा इसे 'न्यायालय के अधीन' बताकर मनमाने ढंग से अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि IGRS जैसी पारदर्शी व्यवस्था को पलीता लगाने वाले DIOS मनोज कुमार मिश्रा और उनके सहयोगियों पर शासन का हंटर कब चलेगा? या फिर बलिया शिक्षा विभाग में 'बिना सुनवाई न्याय' का यह अंधेरगर्दी भरा सर्कस ऐसे ही चलता रहेगा?