'योगी राज' में महिला शिक्षिका की टूटी उंगली, BSA और AD बेसिक खेल रहे फाइलों का 'टेबल टेनिस'!

बरेली के उच्च प्राथमिक विद्यालय में इंचार्ज द्वारा महिला शिक्षिका की उंगली तोड़े जाने के मामले में 18 महीने बाद भी न्याय नहीं मिला है। बीएसए डॉ. विनीता और एडी बेसिक अजीत गंगवार सिर्फ कागजी कार्यवाही का नाटक कर रहे हैं, जिससे महिला सुरक्षा के दावों की पोल खुल रही है।

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जनवार्ता लाइव

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बरेली।

उत्तर प्रदेश में जीरो टॉलरेंस और मिशन शक्ति जैसे नारों का ढिंढोरा खूब पीटा जाता है, लेकिन बरेली के शिक्षा विभाग की चौखट पर ये सारे दावे औंधे मुंह गिरे पड़े हैं। उच्च प्राथमिक विद्यालय, क्यारा की सहायक अध्यापिका सीमा शर्मा पिछले 18 महीनों से अपनी टूटी उंगली और कुचले गए आत्मसम्मान की फाइल लेकर दर-दर भटक रही हैं। लेकिन, न्याय देने के बजाय बरेली की बीएसए और एडी बेसिक फाइलों का टेबल-टेनिस खेलने में व्यस्त हैं।

मामला 23 जनवरी 2025 का है, जब दबंग इंचार्ज अध्यापक प्रमोद कुमार ने सरेआम शिक्षिका सीमा शर्मा का हाथ मरोड़कर उंगली (रिंग फिंगर) तोड़ दी और दर्द से तड़पती महिला का वीडियो बनाकर मजाक उड़ाया। रसूख का आलम ये था कि एफआईआर के लिए भी थाने के पांच दिन चक्कर काटने पड़े। लेकिन असली मानसिक प्रताड़ना तो अब शिक्षा विभाग के अधिकारी दे रहे हैं।

ताजा नाटक बीएसए डॉ. विनीता का है। मामले के रिव्यू का झुनझुना पकड़ाते हुए उन्होंने सोमवार को पीड़िता से फिर से सारे दस्तावेज मांगे। 18 महीने से न्याय की आस लगाए बैठी पीड़िता ने बकायदा ऑफिस में सारे साक्ष्य रिसीव करा दिए। लेकिन कागज़ मिलते ही बीएसए साहिबा ने ऐसा 'मौन व्रत' धारण कर लिया है, मानो उनकी कलम की स्याही ही सूख गई हो।

वहीं, इस मामले में एडी बेसिक अजीत गंगवार का रवैया तो किसी लचर कॉमेडी सर्कस से कम नहीं है। घटना के तुरंत बाद सबसे पहली शिकायत उन्हीं से की गई थी। अब 5 बार साक्ष्य सौंपे जाने के बाद एडी बेसिक बड़े आराम से पल्ला झाड़ते हुए कहते हैं, यह बीएसए के जिले का मामला है, वही देखेंगी। मेरे पास शिकायत आएगी तो फिर बीएसए को लिख दूंगा। यहां बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या पिछले 18 महीनों में लिखे गए पत्र हवा में उड़ गए? या एडी बेसिक महोदय ने बीएसए को कोई आदेश देने की जहमत ही नहीं उठाई?

माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, जरा बरेली के इस शिक्षा विभाग की ओर भी अपनी नजरें इनायत कीजिए। आपके राज में एक पीड़ित महिला अधिकारी-दर-अधिकारी जलील हो रही है और आरोपी खुलेआम घूम रहा है। क्या इन 'कुंभकर्णी' नींद सो रहे अधिकारियों और दबंग इंचार्ज पर आपके सुशासन का चाबुक चलेगा, या फिर महिला सुरक्षा सिर्फ फाइलों की धूल फांकती रहेगी?