बरेली: ऐतिहासिक 459वीं श्रीरामलीला में जीवंत हुए नारद मोह और मनु-शतरूपा तप के प्रसंग, आकाशवाणी से गूंजा प्रभु राम के अवतार का संदेश
बरेली के चौधरी तालाब मैदान में 459 वर्षों पुरानी ऐतिहासिक श्रीरामलीला का भव्य मंचन जारी है। मथुरा-वृंदावन के कलाकारों ने नारद मोह, मनु-शतरूपा तप और रावण जन्म के प्रसंगों का सजीव मंचन कर दर्शकों को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।
बरेली की ऐतिहासिक 459वीं श्रीरामलीला: जब नारद जी के अहंकार को तोड़ने के लिए विष्णु जी ने रची 'विश्वमोहिनी' की माया
जनवार्ता लाइव
बरेली:
बरेली के चौधरी मोहल्ला स्थित सुप्रसिद्ध श्री रानी महालक्ष्मी बाई रामलीला समिति के तत्वावधान में चौधरी तालाब रामलीला मैदान में 459वीं ऐतिहासिक श्रीरामलीला का आयोजन पूरी श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ जारी है। भव्य विद्युत सज्जा, पारंपरिक संगीत और मथुरा-वृंदावन से आए कुशल कलाकारों के जीवंत अभिनय ने पूरे माहौल को राममय बना दिया है।
कामदेव पर विजय और नारद जी का मोह
लीला के आज के विशेष सत्र की शुरुआत देवर्षि नारद के अहंकार-भंग प्रसंग से हुई। कामदेव पर विजय पाने के बाद नारद जी में आए अभिमान को तोड़ने के लिए भगवान विष्णु ने 'विश्वमोहिनी' की माया रची। विष्णु जी द्वारा नारद जी को वानर रूप प्रदान करने और तत्पश्चात नारद जी द्वारा प्रभु को दिए गए श्राप का दृश्य देख दर्शक भावविभोर हो उठे और पूरा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
प्रभु राम के अवतार का मिला वरदान
इसके पश्चात स्वयंभू मनु और महारानी शतरूपा द्वारा नारायण को पुत्र रूप में पाने के लिए किए गए कठिन तप का भावपूर्ण मंचन हुआ, जिसके फलस्वरूप भगवान ने उन्हें स्वयं राम रूप में अवतार लेने का वरदान दिया। अगले प्रसंग में विश्रवा मुनि के यहाँ रावण, कुंभकर्ण और विभीषण के जन्म तथा ब्रह्मा जी से वरदान पाकर तीनों लोकों पर उनके बढ़ते अत्याचारों को दर्शाया गया।
क्षीर