वर्षों से सेवाएं दे रहे शिक्षकों को TET से मिले स्थायी राहत! राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने उठाई दमदार आवाज़

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश के बैनर तले बरेली में शिक्षकों ने विशाल प्रदर्शन कर 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी (TET) की अनिवार्यता खत्म करने की मांग की। इस संबंध में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

वर्षों से सेवाएं दे रहे शिक्षकों को TET से मिले स्थायी राहत! राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने उठाई दमदार आवाज़
टीईटी के विरोध में प्रदर्शन करते पदाधिकारी ।

जनवार्ता लाइव

बरेली।

वर्षों से शिक्षा की अलख जगा रहे शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, उत्तर प्रदेश (प्राथमिक संवर्ग) ने हुंकार भर दी है। 18 जून 2026 को महासंघ के राष्ट्रीय आह्वान पर प्रदेश के सभी 75 जनपदों में विशाल प्रदर्शन किया गया। इसी क्रम में बरेली में भी शिक्षकों ने जोरदार आवाज बुलंद करते हुए प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से प्रेषित किया।  

क्या है शिक्षकों की प्रमुख मांग?

शिक्षकों की मुख्य मांग है कि वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त (देश भर में) और उत्तर प्रदेश में टीईटी (TET) लागू होने की तिथि 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त किया जाए। यह विशाल प्रदर्शन और ज्ञापन कार्यक्रम कार्यकारी जिलाध्यक्ष एवं जिला महामंत्री सुनील कुमार शर्मा के नेतृत्व में संपन्न हुआ।  

ज्ञापन में यह स्पष्ट किया गया है कि 23 अगस्त 2010 को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को न्यूनतम अर्हता के रूप में अधिसूचित किया था। लेकिन इससे पहले ही देश और प्रदेश में लाखों शिक्षक तत्कालीन नियमों के तहत विधिवत नियुक्त हो चुके थे। इन शिक्षकों ने राष्ट्र निर्माण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में अपना बहुमूल्य योगदान दिया है।  

जिला महामंत्री सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि संगठन 29 मई 2026 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पुनर्विचार याचिकाओं पर दिए गए निर्णय का पूर्ण सम्मान करता है। साथ ही उन्होंने यह अपेक्षा भी जताई कि संसद और केंद्र सर