बरेली जेल में जली ज्ञान की ज्योति: 5 महिलाओं समेत 35 बंदियों ने दी 'नवभारत साक्षरता परीक्षा', NIOS देगा प्रमाण पत्र

जिला कारागार बरेली में नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत 35 बंदियों ने परीक्षा दी। जानिए कैसे शिक्षा और कौशल विकास के जरिए बंदियों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

बरेली जेल में जली ज्ञान की ज्योति: 5 महिलाओं समेत 35 बंदियों ने दी 'नवभारत साक्षरता परीक्षा', NIOS देगा प्रमाण पत्र
जनवार्ता लाइव।

सलाखों के पीछे जली ज्ञान की लौ! जिला कारागार बरेली के 35 बंदियों ने दी 'नवभारत साक्षरता परीक्षा'

जनवार्ता लाइव 

बरेली। अपराध से घृणा करो, अपराधी से नहीं" और "शिक्षा ही सुधार का सबसे सशक्त माध्यम है"—इसी संदेश को चरितार्थ करते हुए जिला कारागार, बरेली में एक अभूतपूर्व और प्रेरणादायक पहल देखने को मिली है। कारागार की चारदीवारी के भीतर बंद जो निरक्षर बंदी कभी अक्षर ज्ञान से अनजान थे, वे अब साक्षरता की राह पर कदम बढ़ा चुके हैं।  

भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित 'नवभारत साक्षरता कार्यक्रम' के तहत रविवार, 20 सितम्बर 2026 को जिला कारागार बरेली में 'नवसाक्षर बंदी परीक्षा' का भव्य आयोजन किया गया। इस परीक्षा में कुल 35 बंदियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिनमें 05 महिला बंदी भी शामिल हैं। इस परीक्षा में सफलता प्राप्त करने वाले बंदियों को शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान द्वारा साक्षरता प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा।  

प्रेरणा और उद्घाटन

इस सराहनीय कार्यक्रम की शुरुआत 08 अगस्त 2026 को हुई थी, जिसका उद्घाटन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बरेली की सचिव जया प्रियदर्शिनी द्वारा किया गया था। इस कार्यक्रम को कारागार में प्रभावी ढंग से लागू करने में सेवानिवृत्त जेल अधीक्षक  मोहम्मद अकरम खान का विशेष सहयोग रहा।  

यह पूरी पहल कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान की प्रेरणा और पुलिस महानिदेशक (कारागार) पी. सी. मीणा के कुशल निर्देशन में बंदियों के शिक्षा, सुधार, कौशल विकास और पुनर्वास के लिए संचालित की जा रही है।  

शिक्षा से स्वावलंबन और पुनर्वास की ओर

परीक्षा के दौरान जेल अधीक्षक आलोक शुक्ला ने बताया कि कारागार में बंदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए शिक्षा और कौशल विकास के विविध कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, "इन कार्यक्रमों के माध्यम से बंदी न केवल शिक्षा अर्जित कर रहे हैं बल्कि कौशल सीखकर भविष्य में रोजगà