बरेली PWD में एरियर के नाम पर 1.28 करोड़ का 'डाका': 11 में से 10 बिल निकले फर्जी, जानें कौन-कौन आया लपेटे में!
बरेली पीडब्ल्यूडी (भवना खंड) में वेतन व एरियर के नाम पर 1.28 करोड़ रुपये की भारी अनियमितता का खुलासा हुआ है। जांच में 10 फर्जी भुगतान पकड़े गए हैं, लेकिन हफ्ता बीत जाने के बाद भी FIR दर्ज नहीं हो सकी है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।
सरकारी खजाने से करोड़ों का ‘डाका’ और जांच का वही पुराना ‘ड्रामा’!
जनवार्ता लाइव
बरेली।
जिस सरकारी खजाने में आम आदमी के पसीने की कमाई, किसान की मेहनत का हिस्सा और मजदूर की उम्मीदें जमा होती हैं, पीडब्ल्यूडी (लोक निर्माण विभाग) के भवन खंड ने उस पर ऐसा 'हाथ साफ' किया है कि पूरा विभाग सन्न है। वेतन और एरियर के नाम पर 1.28 करोड़ रुपये की ऐसी चपत लगाई गई कि अब विभाग को समझ नहीं आ रहा कि जांच कहाँ से शुरू करें और अपना मुँह कहाँ छुपाएं!
कहानी 11 कर्मचारियों और अधिकारियों के एरियर भुगतान से शुरू होती है। दो किस्तों में—क्रमशः 67.57 लाख और 61.04 लाख रुपये की ऐसी 'सफाई' हुई कि फाइलों ने भी आह तक नहीं भरी। जब मामले की जांच बैठी, तो पता चला कि 11 में से केवल एक अवर अभियंता का 94,589 रुपये का बिल सच्चा था। बाकी के दस नाम? सब के सब फर्जी! भुगतान पाने वाले कर्मी तो अब विभाग में हैं ही नहीं, मगर सवाल यह है कि जब फाइलें तैयार हो रही थीं, तब सिस्टम के 'पहरेदार' क्या गहरी नींद सो रहे थे?
कार्रवाई के नाम पर फिलहाल चार कर्मचारियों—प्रशासनिक अधिकारी, खंडीय लेखाधिकारी, तत्कालीन आहरण वितरण सहायक और पटल सहायक का वेतन रोक दिया गया है। एक के निलंबन की फाइल भी बढ़ा दी गई है। लेकिन साहब, असली twist तो यह है कि थाने भेजी गई तहरीर में खुद अधिशासी अभियंता महोदय का नाम भी शामिल है! अब आरोप सिद्ध होना अलग बात है, लेकिन सवाल तो उठेगा ही कि जब साहब की नाक के नीचे करोड़ों पार हो गए, तो वो किस नींद में थे?
इधर एफआईआर दर्ज होने का आलम यह है कि कोतवाली में तहरीर दिए हफ्ते भर से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन पुलिस 'हस्ताक्षर के नमूने' ढूंढ रही है। फाइलें घूम रही हैं, पुलिस नमूनों का इंतजार कर रही है और साहब कह रहे हैं—"जांच जारी है, दोषी बख्शे नहीं जाएंगे!"
अब देखना दिलचस्प होगा कि यह 1.28 करोड़ का खेल फाइलों के भारी-भरकम बोझ तले दबकर दम तोड़ देता है, या फिर इस बार गाज सचमुच जिम्मेदार कुर्सियों पर गिरती है!