बलिया DIOS कार्यालय बना 'जादूघर': सहायक अध्यापक बने 'साहब', कुर्सी पर बैठकर निपटा रहे फाइलें और जांच!
बलिया डीआईओएस कार्यालय में सहायक अध्यापक द्वारा फर्जीवाड़े की शिकायतों के आईजीआरएस निस्तारण पर उठे सवाल। शासन के नियमों की अनदेखी और पदभार के दुरुपयोग का आरोप।
पुरानी आख्या की 'फोटोकॉपी' चिपकाकर आईजीआरएस शिकायतों का हो रहा 'जादुई' निस्तारण; शासन के सख्त निर्देशों की धज्जियां उड़ाने का आरोप
जनवार्ता लाइव
बलिया। जनपद का जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय इन दिनों अपने कारनामों को लेकर फिर सुर्खियों में है। विभागीय गलियारों में चर्चा है कि यह कार्यालय कम और 'जादूघर' ज्यादा बन चुका है, जहां नियमों और शासन के सख्त आदेशों को ताक पर रखकर 'अद्भुत' खेल खेले जा रहे हैं।
ताजा मामला आईजीआरएस शिकायतों के निस्तारण और पदभार के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है।
सहायक अध्यापक की 'कुर्सी महिमा': 13 साल से कार्यालय से 'संबद्ध'?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, विसुकिया में मूल रूप से 'सहायक अध्यापक' के पद पर तैनात और प्रभारी प्रधानाचार्य का कार्यभार संभालने वाले श्री अतुल तिवारी कथित तौर पर पिछले 13 वर्षों से डीआईओएस कार्यालय बलिया से संबद्ध हैं। आरोप है कि वे मूल विद्यालय जाने के बजाय यहीं से सारे कामकाज निपटा रहे हैं।
इतना ही नहीं, सह जिला विद्यालय निरीक्षक और तीन राजकीय इंटर कॉलेजों के प्रधानाचार्य पद की मौजूदगी के बावजूद, उन्हें किन विशेष 'उद्देश्यों' की पूर्ति के लिए डीआईओएस का प्रभार और कागजातों पर हस्ताक्षर के अधिकार दिए गए हैं, यह बड़ा सवाल खड़ा करता है।
वित्तीय नियमों की अनदेखी!
नियमों के मुताबिक, किसी भी सहायक अध्यापक को वित्तीय मामलों से जुड़े पदभार नहीं सौंपे जा सकते। इसके बावजूद, समग्र शिक्षा अभियान (माध्यमिक) के तहत उन्हें अनाधिकृत रूप से 'सहायक लेखा अधिकारी' का प्रभार सौंपे जाने पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। चर्चा है कि जब जिले में पहले से ही वित्त एवं लेखा अधिकारी और लेखाकार तैनात हैं, तब किसी सहायक अध्यापक को यह जिम्मेदारी देना संदेह के घेरे में आता है।
पुराना जवाब, नया संदर्भ: 'जादुई' निस्तारण का खेल
ताजा वाकया 21 सितंबर 2026 का है। बांसडीह इंटर कॉलेज में कूटरचित दस्तावेजों और फर्जी हस्ताक्षरों के आधार पर 5 परिचारकों व 1 सहायक लिपिक की कथित अवैध नियुक्ति से जुड़ी शिकायत दर्ज कराई गई थी। जब शिकायतकर्ता ने पुराने निस्तारण पर आपत्ति जताई, तो 21.09.2026 को नए शिकायती संदर्भ संख्या का निस्तारण करते हुए 11.09.2026 की पुरानी आख्या की प्रति संलग्न कर पल्ला झाड़ लिया गया।
जबकि शासन का स्पष्ट और सख्त आदेश है कि आईजीआरएस शिकायतों का निस्तारण केवल सक्षम अधिकारी ही करेंगे और किसी अन्य के हस्ताक्षर से निस्तारण आपत्तिजनक एवं नियमानुकूल नहीं है।
हस्तांतरण से लेकर चुनाव तक में 'खास भूमिका'
आरोपों की सूची यहीं खत्म नहीं होती। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, रसड़ा के नवनिर्मित भवन का हस्तांतरण मूल प्रधानाचार्य के बजाय श्री तिवारी द्वारा राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय हजौली के प्रधानाचार्य पद पर रहते हुए प्राप्त किए जाने पर भी सवाल उठे हैं। इसके अलावा, प्रबंधकीय विवादों और डिस्पैच पंजिका के पत्रों पर भी उनके हस्ताक्षर होने के दावे किए जा रहे हैं।
अब देखना यह है कि नियमों को दरकिनार कर चलाए जा रहे इस 'जादूघर' और कागजी खेल पर उच्च अधिकारी संज्ञान लेकर क्या कार्रवाई करते हैं या यह 'जादुई' निस्तारण ऐसे ही जारी रहेगा!