बाली में गूंजा हिंदी का डंका: डॉ. शशि रानी सिंह को इंडोनेशिया के अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिला मान, भारत-इंडोनेशिया के बीच मजबूत हुआ सांस्कृतिक सेतु
इंडोनेशिया के बाली में आयोजित भव्य अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार और वैश्विक योगदान के लिए डॉ. शशि रानी सिंह को सम्मानित किया गया। हिन्दू यूनिवर्सिटी के कुलपति और धर्म गुरुओं ने उन्हें इस उपलब्धि पर आशीर्वाद दिया।
हिन्दी भाषा की गूंज अब सात समंदर पार इंडोनेशिया के खूबसूरत द्वीप बाली में भी सुनाई दे रही है। मौका था बाली में आयोजित एक भव्य अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का, जहाँ हिंदी के वैश्विक प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका निभाने के लिए डॉ. शशि रानी सिंह को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मान से नवाजा गया।
यह गरिमामयी आयोजन 12 अक्टूबर से 17 अक्टूबर तक 'वैश्विक मित्रता और हिंदी' मुख्य विषय के तहत संपन्न हुआ। इसका आयोजन देवनागरी उत्थान फाउंडेशन, बाली इंडोनेशिया की हिन्दू यूनिवर्सिटी, पंडित तिलक राज शर्मा स्मृति न्यास (अमेरिका) और इंडोनेशिया धर्म फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था।
बाली के प्रमुख शिक्षा केंद्र 'आई जी बी स्टेट हिन्दू यूनिवर्सिटी' में हुई संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत का प्रतिनिधित्व डॉ. सुनील दुबे ने किया, जबकि स्थानीय प्रोफेसरों ने अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए। इस मंच पर डॉ. शशि रानी सिंह को यूनिवर्सिटी के कुलपति द्वारा भारत और बाली के बीच भाषाई और सांस्कृतिक सेतु को मजबूत करने के उनके अमूल्य योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
सम्मान की इस कड़ी में बाली के एक प्रतिष्ठित आश्रम के धर्म संस्थापक डॉ. ई मादे धर्म यश जी ने भी उनके साहित्यिक और सामाजिक कार्यों की सराहना करते हुए विशेष आशीर्वाद प्रदान किया। डॉ. सिंह की इस अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि से देश-विदेश के शिक्षाविदों, साहित्यकारों और उनके शुभचिंतकों में खुशी की लहर है।