बरेली में 'होम डिलीवरी' वाला धर्म! किराए के कमरों में सजे 'अवैध चर्च', चंदे की मोटी रकम पर ऑडिट का 'नो नेटवर्क'
उत्तर प्रदेश के बरेली में इज्जतनगर, सुभाषनगर और कैंट क्षेत्र के किराए के मकानों में बिना अनुमति 'अवैध चर्च' चलाए जाने का मामला सामने आया है। पादरियों के ज्ञान, बिन-ऑडिट चंदे और मकान मालिकों की बेफिक्री पर एक रिपोर्ट।
जब 'किराए का मकान' बन गया 'प्रार्थना सभा'... बरेली में चल रहा गजब का खेल!
जनवार्ता लाइव
बरेली।
कहते हैं 'भगवान कण-कण में वास करते हैं', लेकिन उत्तर प्रदेश के बरेली में इस कहावत को थोड़ा ज्यादा ही संजीदगी से ले लिया गया है। शहर के इज्जतनगर, सुभाषनगर और कैंट इलाकों में आजकल आस्था का नया 'स्टार्टअप' फल-फूल रहा है। जो चर्च किसी बड़ी-भव्य इमारत में चलने चाहिए थे, वे अब टू-बीएचके और किराए के कमरों में होम डिलीवरी की तर्ज पर चलाए जा रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि इज्जतनगर क्षेत्र में तो इस खेल के खिलाड़ी काफी मंजे हुए निकले हैं। अपने आप को चर्च का पादरी बताने वाले महानुभावों की बयानबाजी और मंच से दिए जाने वाले प्रवचन इतने भारी-भरकम होते हैं कि सुनने वालों का चकरा जाना तय है। मंच से पारिवारिक सौहार्द पर लंबी-चौड़ी बातें होती हैं, पर पर्दे के पीछे का गणित कुछ ऐसा है कि दो-चार घरों के रिश्तों में दरार आ जाए तो अचरज नहीं।
चंदे का चक्कर, बाबू भैया!
अब बात करते हैं इस पूरे मामले के सबसे 'पवित्र' पहलू की—यानी धन-दक्षिणा! इन अवैध ठिकानों पर आने वाले श्रद्धालुओं से मोटा 'विश्वास' (और उससे भी मोटा चंदा) इकट्ठा किया जा रहा है। मजेदार बात यह है कि इस चंदे का ऑडिट कराने के नाम पर सभी संबंधित पक्षों के पास 'नो नेटवर्क' का बहाना तैयार रहता है। कोई खाता-बही नहीं, कोई सरकारी लेखा-जोखा नहीं। आखिर 'श्रद्धा' का ऑडिट भला कौन करता है!
मकान मालिक हैरान, प्रशासन हलकान
बेचारे मकान मालिकों ने तो अपना घर किसी सीधे-सादे किराएदार को रहने के लिए दिया था, पर उन्हें क्या पता था कि सुबह-शाम उनके लिविंग रूम में पूरा का पूरा मजमा जुटने लगेगा। बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के चल रहे इन तथाकथित चर्चों को देखकर लगता है कि नियम-कानून शायद कहीं आराम फरमा रहे हैं।
वहीं, स्थानीय लोग और हिंदू समाज के प्रबुद्ध नागरिक भी इस 'साà¤