फ्री बिजली' का अचूक फॉर्मूला: न लाइट आएगी, न बिल आएगा! गुरदासपुर के ठक्कर संधू में 'मुफ्त अंधेरे' का बंपर ऑफर
पंजाब सरकार के 'मुफ्त बिजली' के दावों की पोल गुरदासपुर के ठक्कर संधू और आसपास के गांवों में खुल रही है। भीषण गर्मी में पावर हाउस 'डेरीवाल दरोगा' कोमा में है और लोग वादों के बीच पसीना बहाने को मजबूर हैं।
जनवार्ता लाइव
गुरदासपुर।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान मंचों से सीना ठोककर कहते हैं कि उन्होंने सूबे में बिजली मुफ्त कर दी है। लेकिन गुरदासपुर जिले के हल्का कादियां के गांव 'ठक्कर संधू' और उसके आसपास के गांवों के लोग इस 'मुफ्त' शब्द का असली मतलब अब जाकर समझ रहे हैं। दरअसल, सरकार का गणित एकदम सटीक है— जब तारों में करंट ही नहीं दौड़ेगा, तो मीटर कैसे घूमेगा? और जब मीटर ही नहीं घूमेगा, तो बिल तो अपने आप 'जीरो' आएगा!
भीषण गर्मी में जब आसमान से आग बरस रही है, तब ठक्कर संधू के ग्रामीण 'रंगले पंजाब' का लुत्फ हाथ वाले पंखे झलकर उठा रहे हैं। इन गांवों को रोशन करने का जिम्मा 'डेरीवाल दरोगा' पावर हाउस के पास है, लेकिन हालात देखकर लगता है कि भीषण गर्मी में इस पावर हाउस के सिस्टम को ही लू लग गई है। ग्रामीणों ने तमाम अधिकारियों के दरवाजे खटखटाए, लेकिन 'फ्री बिजली' के नशे में सो रहे सिस्टम के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही।
चुनावों के वक्त जो मंत्री और विधायक गांव को सीधा 'पेरिस' बनाने का नक्शा जेब में लेकर आते थे, वो शायद यह भूल गए कि विकास के लिए खंभों में लाइट भी छोड़नी पड़ती है। विकास के नाम पर ठक्कर संधू आज भी लालटेन युग में जी रहा है। बड़े-बड़े वादों की हवा निकल चुकी है और जनता वातानुकूलित (AC) कमरों में बैठे नेताओं के दावों के बीच, बिना पंखे के ही तड़प रही है।