शिक्षा विभाग की निंजा तकनीक: कुर्सी बचाने के लिए रातों-रात पैदा किए 90 'कागजी' छात्र, कला वाले गुरुजी को थमा दी गणित की किताब!
बरेली के कांधरपुर प्राथमिक विद्यालय में अतिरिक्त शिक्षकों को समायोजन से बचाने के लिए 'जादुई' तरीके से 90 छात्रों की संख्या बढ़ा दी गई। पोल खुली तो इसे 'तकनीकी खामी' बता दिया गया। वहीं हिम्मतपुर में कला-भाषा के शिक्षक को रातों-रात गणित-विज्ञान का विद्वान घोषित कर दिया गया। पढ़िए इस 'महान' कार्यप्रणाली पर हमारी खास रिपोर्ट।
जनवार्ता लाइव
बरेली।
बरेली का बेसिक शिक्षा विभाग इन दिनों किसी चमत्कारिक तिलिस्म से कम नहीं है। क्यारा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय कांधरपुर में मास्टरों की कुर्सी बचाने के लिए जो कागजी खेल खेला गया, वह किसी भी नामी जादूगर को हैरत में डाल सकता है।
दरअसल, नियमों के तहत 30 अप्रैल की छात्र संख्या के आधार पर अतिरिक्त शिक्षकों' (सरप्लस) की छंटनी होनी थी। पहली सूची में कांधरपुर विद्यालय के रजिस्टर में 242 बच्चे दर्ज थे, जिसके आधार पर नेहा, पंकज, नीतू और रजनी को अतिरिक्त शिक्षक घोषित कर दिया गया। अब भला अपना जमा-जमाया स्कूल छोड़कर कौन जाना चाहता है? बस फिर क्या था, विभाग की जादुई छड़ी घूमी और आनन-फानन में एक नई सूची प्रकट हो गई। इस नई सूची में अचानक 90 भूतिया बच्चों का एडमिशन हो गया और छात्र संख्या 242 से छलांग मारकर सीधे 323 पहुँच गई!
इस विभागीय चमत्कार का सीधा फायदा यह हुआ कि पंकज राठौर और रजनी का नाम रातों-रात अतिरिक्त शिक्षकों की सूची से गायब हो गया। लेकिन अफ़सोस, इस धांधली की भनक बाहर लग गई और विभाग में हड़कंप मच गया। भारी विरोध के बाद गुरुवार शाम तीसरी सूची जारी करनी पड़ी, जिसमें 90 भूतिया छात्रों को वापस गायब कर संख्या 242 कर दी गई। इस पूरे फर्जीवाड़े पर बीईओ पूरन लाल ने बड़ी मासूमियत से इसे महज एक "तकनीकी खामी और भूलवश हुई गलती" करार दे दिया।
इधर, कंपोजिट विद्यालय हिम्मतपुर में एक अलग ही प्रतिभा निखर कर सामने आई। कला और भाषा पढ़ाने वाले शिक्षक चंद्रपाल सिंह यादव को समायोजन सूची में रातों-रात विज्ञान और गणित का 'विद्वान' घोषित कर दिया गया। पूर्व ब्लॉक प्रमुख आदेश यादव 'गुड्डू' ने जब शिक्षक के समर्थन में आवाज उठाई, तब जाकर बीएसए डॉ. विनीता ने मामले की जांच का चिर-परिचित आश्वासन दिया है।
इन सबके बीच, यूपी बोर्ड ने भी दो साल से निष्क्रिय पड़े उत्तम पब्लिक और सेंट जोसेफ जैसे 33 माध्यमिक स्कूलों की मान्यता रद्द कर दी है, जहाँ न कोई बच्चा था न कक्षाएं। कुल मिलाकर, शिक्षा विभाग का यह 'सर्कस' इन दिनों पूरे शबाब पर है!