बलिया DIOS कार्यालय का 'जादू': जांच पूरी होने से पहले ही बंद कर दी महाघोटाले की फाइल, जादूगर बाबू पर सिर्फ 'सीट' बदलने की मेहरबानी!

बलिया शिक्षा विभाग का बड़ा खेल! बाँसडीह इंटर कॉलेज में हुए फर्जी दस्तखत और कूटरचित नियुक्तियों के महाघोटाले में घिरे बाबू संजय यादव को बचाने की कवायद शुरू। DIOS मनोज कुमार मिश्र ने एक महीने की जांच रिपोर्ट आने से पहले ही आईजीआरएस पोर्टल पर मामला 'निक्षेपित' करने की रिपोर्ट लगा दी। सवाल यह है कि घोटाले की सजा सिर्फ 'सीट परिवर्तन' क्यों? देखिए जनवार्ता लाइव की यह खास रिपोर्ट।

बलिया DIOS कार्यालय का 'जादू': जांच पूरी होने से पहले ही बंद कर दी महाघोटाले की फाइल, जादूगर बाबू पर सिर्फ 'सीट' बदलने की मेहरबानी!
जनवार्ता लाइव

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बलिया।

उत्तर प्रदेश सरकार जनसुनवाई पोर्टल को लेकर जितनी गंभीर है, बलिया के जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के साहबान इसे उतनी ही मज़ाकिया 'जादू की छड़ी' समझते हैं। मामला बाँसडीह इंटर कॉलेज में साल 2012 में हुई कूटरचित नियुक्तियों, फर्जी दस्तखतों और शिक्षा विभाग की आंखों में धूल झोंकने के महाघोटाले से जुड़ा है। इस मामले के मुख्य जादूगर पटल प्रभारी बाबू संजय यादव को बचाने और शिकायतकर्ता की शिकायत को कागजों के मलबे में दबाने का एक अनोखा 'प्रशासनिक चमत्कार' डीआईओएस कार्यालय में देखने को मिला है।

 

जांच एक महीने चलेगी लेकिन निस्तारण आज ही मंजूर हो!

 

डीआईओएस मनोज कुमार मिश्र की ओर से जिलाधिकारी को भेजी गई निस्तारण आख्या अपने आप में हास्यास्पद और विरोधाभासों से भरी हुई है। एक तरफ तो साहब खुद दस्तखत करके मान रहे हैं कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं, फर्जी हस्ताक्षर और कूटरचित अभिलेखों का खेल हुआ है और इसकी विस्तृत जांच के लिए एक माह का समय चाहिए"। लेकिन डिजिटल दुनिया में अपनी पीठ थपथपाने और आईजीआरएस का पेंडेंसी ग्राफ सुधारने के चक्कर में साहब ने बिना असली जांच-पड़ताल किए ही मामले को 'निक्षेपित  करने की संस्तुति कर डाली।

साहब की प्रशासनिक बुद्धिमानी की दाद देनी होगी! जब जांच पूरी ही नहीं हुई, साक्ष्य जुटाए ही जा रहे हैं, तो किस बिनाह पर शिकायत को 'निस्तारित' मानकर फाइल बंद करने की गुहार लगाई जा रही है? क्या इसे ही कहते हैं डिजिटल इंडिया में 'कागजी इंसाफ'?

 बाबू  पर मेहरबानी: गुनाह बड़ा तो सजा सिर्फ 'सीट परिवर्तन'?

 

शिकायत में जिस पटल प्रभारी संजय यादव पर फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप हैं, उसे लेकर डीआईओएस साहब की 'सख्ती' भी देखने लायक है। निष्पक्षता और पारदर्शिता का ढोंग रचने के लिए बाबू संजय यादव का महज पटल (सीट) बदल दिया गया है।

 विभाग से जनता पूछ रही है:

* क्या करोड़ों के वारे-न्यारे और फर्जी नियुक्तियों के खेल की सजा सिर्फ एक कमरे से दूसरे कमरे की सीट पर बैठना है?

* जब आरोपी बाबू विभाग में ही मौजूद है, तो क्या वो चल रही जांच और अभिलेखों को प्रभावित नहीं करेगा?

* बिना किसी अंतिम निर्णय या विधिक कार्यवाही के, सिर्फ 'पटल परिवर्तन' को अंतिम कार्रवाई मानकर आईजीआरएस में रिपोर्ट कैसे लगा दी गई?

 मुख्यमंत्री पोर्टल का मज़ाक उड़ाते साहब

शिकायतकर्ता ने दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ जिस उच्चस्तरीय विधिक कार्रवाई की मांग की थी, उसे DIOS मनोज कुमार मिश्र ने एक झटके में ठंडे बस्ते में डाल दिया है। अभी जांच के नाम पर केवल "अभिलेखों का संकलन" हो रहा है, लेकिन आईजीआरएस पोर्टल पर मामला 'क्लोज' दिखाने की यह जल्दबाजी साफ इशारा करती है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है।

अब देखना यह है कि बलिया के जिलाधिकारी महोदय DIOS साहब की इस 'जादूई निस्तारण आख्या' को स्वीकार करते हैं या फिर बिना जांच के मामला रफा-दफा करने वाले इस खेल पर खुद संज्ञान लेते हैं।