शाहजहाँपुर में लेखपाल साहब को 'तूदाबन्दी' पड़ी भारी, 10 हजार की रिश्वत लेते 'रंगे हाथ' दबोचे गए
भ्रष्टाचार निवारण संगठन की बरेली टीम ने शाहजहाँपुर के तहसील सदर में तैनात लेखपाल योगेश कुमार तिवारी को रिश्वतखोरी के आरोप में रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।
जनवार्ता लाइव
बरेली।
कहते हैं कि 'सरकारी बाबू' की कलम में बड़ी ताकत होती है, लेकिन शाहजहाँपुर के तहसील सदर में तैनात लेखपाल योगेश कुमार तिवारी ने उस कलम की ताकत को 'नोट गिनने की ताकत' समझ लिया था। गोकुलपुरी, दिल्ली के रहने वाले लेखपाल साहब शायद भूल गए थे कि उत्तर प्रदेश में अब भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की हवा चल रही है।
मामला सीधा सा था—शिकायतकर्ता शाकिर अली अपनी माताजी श्रीमती दिलशाद बानो के खेत की 'तूदाबन्दी' (सीमांकन) कराना चाहते थे। लेकिन लेखपाल साहब ने इस कानूनी काम के लिए अपनी 'फीस' 10,000 रुपये तय कर रखी थी। शाकिर अली ने ठान लिया कि वे इस घूसखोरी को बर्दाश्त नहीं करेंगे और उन्होंने भ्रष्टाचार निवारण संगठन (Anti-Corruption Organization) का दरवाजा खटखटाया।
फिर क्या था, भ्रष्टाचार निवारण संगठन, बरेली की टीम पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरी। ट्रैप टीम के प्रभारी निरीक्षक जितेन्द्र सिंह ने जाल बिछाया। आज दिनांक 01.07.2026 को दोपहर 12:37 बजे, जैसे ही लेखपाल योगेश कुमार तिवारी ने नया बाईपास फ्लाईओवर के नीचे घूस के 10,000 रुपये अपने हाथों में लिए, टीम ने उन्हें दबोच लिया।
रंगे हाथ पकड़े जाने के बाद लेखपाल साहब का चेहरा देखने लायक था। अब लेखपाल साहब की तैनाती तो तहसील में है, लेकिन अब उनके खिलाफ थाना कटरा, जनपद शाहजहाँपुर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत कर उन्हें सलाखों के पीछे भेजने की तैयारी की जा रही है।
यह गिरफ्तारी उन सभी के लिए एक कड़ा संदेश है जो सरकारी पद का दुरुपयोग कर जनता की जेब काटने का ख्वाब देखते हैं। भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने साफ कर दिया है कि घूसखोरी का यह खेल अब और नहीं चलेगा।