हाथ में iPhone, दरवाजे पर चमचमाती कार और टपकती चर्च की छत: जब 'सेवा' छोड़ 'मेवा' बटोरने में जुटे उत्तर भारत के पादरी!

उत्तर भारत के चर्चों में कलीसिया (संगति) घटने और विश्वासियों के बैकस्लाइड होने की असल वजह क्या है? जानिए कैसे पादरियों का लालच, भेड़-चोरी (Sheep Stealing) और अमीर-गरीब का भेदभाव मसीही समाज को खोखला कर रहा है।

हाथ में iPhone, दरवाजे पर चमचमाती कार और टपकती चर्च की छत: जब 'सेवा' छोड़ 'मेवा' बटोरने में जुटे उत्तर भारत के पादरी!
जनवार्ता लाइव

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बरेली।

कहते हैं कि एक अच्छा चरवाहा अपनी भेड़ों के लिए जान दे देता है। लेकिन आज उत्तर भारत के कई इलाकों में नजारा थोड़ा बदल चुका है—अब चरवाहा भेड़ों के लिए जान नहीं देता, बल्कि भेड़ों की बदौलत iPhone 15 Pro Max और चमचमाती फोर-व्हीलर खरीदता है!

बरेली से लेकर पूरे उत्तर भारत के मसीही गलियारों में इन दिनों एक अजीब सा 'व्यापारिक मॉडल' चल रहा है। पादरी साहिबान को प्रभु के वचन से ज्यादा अब गाड़ियों के शोरूम और एप्पल के स्टोर में दिलचस्पी हो गई है। नतीजा? कलीसिया (संगति) खाली हो रही है, चर्च ताले लटकने की कगार पर हैं और विश्वासी भ्रमित होकर पीछे (Backslide) हट रहे हैं।

???? "भेड़-चोरी" का नया धंधा: मेहनत किसी की, मलाई किसी और की!

आजकल चर्चों में आत्मिक उन्नति से ज्यादा 'भेड़-चोरी' (Sheep Stealing) का हुनर देखा जा रहा है।

कहानी बड़ी दिलचस्प है: एक सच्चा और ईमानदार पादरी दिन-रात पसीना बहाकर, प्रार्थनाएं करके एक-एक व्यक्ति को प्रभु में पक्का करता है। लेकिन तभी एंट्री होती है 'हाई-टेक पादरी' की! वे आते हैं, मेहनत करने वाले पादरी के खिलाफ कान भरते हैं, भड़काते हैं और बनी-बनाई कलीसिया को अपनी ओर खींच लेते हैं।

सीधा गणित है—दूसरों का खेत कटा-कटाया मिले, तो फसल बोने की मेहनत कौन करे!

???? फटा हुआ स्पीकर, टपकती छत... लेकिन पादरी साहब "फुल VIP"!

चर्च की हालत ऐसी है कि:

माइक में से प्रभु का वचन कम और घड़घड़ाहट ज्यादा आती है (क्योंकि स्पीकर फटा है)।

बारिश हो जाए तो विश्वासी वचन सुनने से ज्यादा छत से टपकते पानी से बचने में लगे रहते हैं।

दीवारों पर पुट्टी गायब है, कई जगह तो रेंट देने के लाले पड़े हैं!

लेकिन जरा रुकिए! नजर घूमकर अगर पादरी साहब पर जाए, तो प्रभु की कृपा का असली नजारा वहीं दिखता है। हाथ में एप्पल का लेटेस्ट फोन, दरवाजे पर खड़ी नई फोर-व्हीलर और चेहरे पर आत्मिक नहीं, बल्कि वित्तीय चमक!

अब विश्वासी भी