तुगलकी फरमान! BEO पूरन सिंह का नया आदेश, संकुल मीटिंग के नाम पर शिक्षकों की छुट्टियों पर लगाया 'ताला'

बरेली: विकास क्षेत्र क्यारा के खण्ड शिक्षा अधिकारी (BEO) पूरन सिंह ने संकुल मीटिंग के दिन शिक्षकों के आकस्मिक अवकाश पर रोक का फरमान जारी कर नया विवाद खड़ा कर दिया है। जानिए क्या है पूरा मामला और क्यों आक्रोशित हैं शिक्षक!

तुगलकी फरमान! BEO पूरन सिंह का नया आदेश, संकुल मीटिंग के नाम पर शिक्षकों की छुट्टियों पर लगाया 'ताला'
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बरेली।

सुर्खियों में रहने के शौकीन BEO पूरन सिंह का नया 'तुगलकी फरमान': मीटिंग के नाम पर शिक्षकों के संवैधानिक अधिकारों पर ताला!

 

बेसिक शिक्षा विभाग में अपने अनूठे फरमानों और अमर्यादित कार्यशैली के लिए अक्सर चर्चाओं (और विवादों) में रहने वाले विकास क्षेत्र क्यारा (बरेली) के खण्ड शिक्षा अधिकारी (BEO) पूरन सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार साहब ने 'संकुल मीटिंग' के नाम पर ऐसा हुक्मनामा जारी कर दिया है, जिसे देखकर शिक्षक संघ से लेकर आम जनमानस तक हैरान भी है और लोटपोट भी!

क्या है नया फरमान?

कार्यालय खण्ड शिक्षा अधिकारी विकास क्षेत्र–क्यारा द्वारा जारी पत्र के अनुसार, 21 जुलाई 2026 को दोपहर 12:30 बजे संकुल मीटिंग बुलाई गई है। यहाँ तक तो सब सामान्य और विभागीय प्रक्रिया का हिस्सा लगता है। लेकिन असली 'साहबी तेवर' और 'कानूनी महारत' पत्र के अंत में नीली स्याही से घेरे गए 'नोट' में झलकती है, जिसमें साहब ने फरमाया है:

"नोट:– उक्त दिवस पर आकस्मिक अवकाश देय नहीं होगा।"

यानी अगर किसी शिक्षक के घर में अचानक कोई आपात स्थिति आ जाए, कोई बीमार पड़ जाए या कोई अनहोनी हो जाए... तो क्यारा क्षेत्र के शिक्षकों को साहब के सामने उपस्थित होना ही पड़ेगा! नियम-कायदे और शिक्षकों के संवैधानिक आकस्मिक अवकाश (Casual Leave) के अधिकार को BEO पूरन सिंह ने एक ही हस्ताक्षर से खारिज कर दिया।

पुराना इतिहास: विवादों से पुराना नाता!

यह पहला मौका नहीं है जब BEO पूरन सिंह अपने फैसलों या भाषा शैली को लेकर कठघरे में खड़े हुए हों। विभाग के अंदरूनी सूत्रों और शिक्षकों की मानें तो पूरन सिंह पहले भी ऐसे अनाप-शनाप आदेशों, बिना सोचे-समझे जारी फरमानों और अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल के लिए जाने जाते रहे हैं। नियम-कानूनों की धज्जियाँ उड़ाना और अपनी मर्जी को ही 'विभाग का कानून' बना देना साहब की पुरानी आदत रही है।

शिक्षक वर्ग में भारी रोष का माहौल

इस 'तुगलकी आदेश' के वायरल होते ही शिक्षकों और शिक्षक संगठनों में जबरदस्त आक्रोश है। सोशल मीडिया पर भी इस पत्र को लेकर व्यंग्यबाण चलाए जा रहे हैं:

“क्या अब बीमारी या आकस्मिक विपत्ति भी BEO साहब की अनुमति और संकुल मीटिंग का कैलेंडर देखकर आएगी?”

“जब साहब खुद ही नियम बनाने और बदलने वाली सर्वोच्च संस्था बन चुके हैं, तो शासन के सेवा-नियमावली का क्या काम?”

उठ रहे गंभीर सवाल:

क्या BEO के पास सेवा नियमावली द्वारा प्रदत्त आकस्मिक अवकाश पर प्रतिबंध लगाने का कोई कानूनी अधिकार है?

क्या विभागीय बैठकों की आड़ में शिक्षकों का मानसिक उत्पीड़न करना ही अब शिक्षा सुधार का नया मॉडल है?

पूर्व में भी विवादित रहे अधिकारी पर उच्चाधिकारियों (BSA / संयुक्त शिक्षा निदेशक) की मेहरबानी का राज क्या है?

शिक्षकों ने मांग की है कि उच्चाधिकारी तत्काल प्रभाव से इस गैर-कानूनी और तानाशाही आदेश का संज्ञान लें तथा मनमाने रवैये और अमर्यादित कार्यशैली के आदी हो चुके BEO पूरन सिंह के खिलाफ दंडात्मक विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करें।

अब देखना यह होगा कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी इस 'शाही फरमान' पर क्या रुख अपनाते हैं या फिर पूरन सिंह का यह तुगलकी फरमान यूँ ही कायम रहेगा!