महिला शिक्षिका की उंगली तोड़ने वाले आरोपी को बचाने में जुटा शिक्षक संगठन का पदाधिकारी

बरेली में महिला शिक्षिका की उंगली तोड़े जाने के मामले में शिक्षक संघ का तथाकथित पदाधिकारी अब आरोपी शिक्षक प्रमोद कुमार को बचाने के लिए जिलाधिकारी को पत्र भेजकर भ्रमित कर रहा है। जानिए इस मामले में क्यों उठ रहे हैं जांच कमेटी पर सवाल।

महिला शिक्षिका की उंगली तोड़ने वाले आरोपी को बचाने में जुटा शिक्षक संगठन का पदाधिकारी
जनवार्ता लाइव

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बरेली। 

 उत्तर प्रदेश में एक तरफ जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की सरकार जीरो टॉलरेंस नीति और मिशन शक्ति के तहत सूबे में महिला सुरक्षा का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं बरेली के शिक्षा विभाग और शिक्षक संघ की चौखट पर इन सरकारी दावों का सरेआम जनाजा निकल चुका है। उच्च प्राथमिक विद्यालय क्यारा की सहायक अध्यापिका सीमा शर्मा पिछले 18 महीनों से इंचार्ज प्रमोद कुमार द्वारा सरेआम हाथ मरोड़कर उंगली (रिंग फिंगर) तोड़े जाने के मामले में न्याय की फाइल लेकर दर-दर भटक रही हैं। लेकिन सबसे ज्यादा हैरान और आक्रोशित करने वाली बात यह है कि इस गंभीर वारदात पर करीब दो साल से रहस्यमयी चुप्पी साधे बैठा शिक्षक संघ का एक तथाकथित पदाधिकारी अब अपनी खाल बचाने के लिए खुलकर आरोपी के पक्ष में आ खड़ा हुआ है।

 सवाल यह उठता है कि जब स्कूल परिसर के भीतर एक असहाय महिला शिक्षिका की उंगली सरेआम मरोड़कर तोड़ी जा रही थी और दर्द से तड़पती बेबस महिला का वीडियो बनाकर उसका मजाक उड़ाया जा रहा था, तब शिक्षक संघ और इसके ये तथाकथित रक्षक किस कुंभकर्णी नींद में सो रहे थे? करीब दो साल तक जब पीड़ित शिक्षिका न्याय की आस में दफ्तरों के चक्कर काटती रही, तब शिक्षक संगठन के इस तथाकथित स्वयंभू पदाधिकारी को सांप क्यों सूंघा था?

जमीनी हकीकत यह है कि इस संगठन के स्वार्थी पदाधिकारी पवित्र बैनर का खुला दुरुपयोग कर रहे हैं। ये पदाधिकारी खुद ऐसे अनेक अनैतिक और आपराधिक कृत्यों में लिप्त हैं जो शिक्षक समाज और संगठन की गरिमा के पूरी तरह खिलाफ हैं। बेशर्मी की तमाम हदें पार करते हुए इस पदाधिकारी ने अब सीधे जिलाधिकारी को एक पत्र भेजकर पूरे मामले को गोलमोल करने और प्रशासन को भ्रमित करने का कुत्सित प्रयास किया है, ताकि किसी भी तरह आरोपी शिक्षक प्रमोद कुमार की गर्दन को बचाया जा सके।

इस पूरे प्रकरण में प्रशासनिक शिथिलता भी पूरी तरह से कटघरे में है, जहां महीनों से बीएसए डॉ. विनीता और एडी बेसिक अजीत गंगवार कागजी फाइलों का टेबल-टेनिस खेलने में व्यस्त रहे। हालांकि, मीडिया और चौतरफा दबाव के बाद अब जाकर बीएसए ने इस संबंध में तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन कर एक हफ्ते के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने का झुनझुना पकड़ाया है। लेकिन इस तथाकथित जांच का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि टीम में क्यारा के ही उसी ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को जानबूझकर शामिल कर दिया गया है, जो पहले दिन से ही पीड़ित शिक्षिका की एक भी शिकायत सुनने को तैयार नहीं थे।

अब ऐसे पक्षपाती अधिकारी की मौजूदगी में यह जांच रिपोर्ट कितनी निष्पक्ष और पारदर्शी होगी, यह परिणाम आने से पहले ही तय माना जा सकता है। विभाग के इस 'अपनों को रेवड़ी बांटने' और दोषी को बचाने के खेल को जनता अब अच्छी तरह समझ चुकी है। बड़ा सवाल यह है कि क्या शिक्षा विभाग हाथ पर हाथ धरे शिक्षिका के न्यायालय की शरण में जाने का इंतजार कर रहा था? मुख्यमंत्री योगी जी के सुशासन में इस तरह की प्रशासनिक अराजकता और गुंडागर्दी बिल्कुल बर्दाश्त से बाहर है। जिलाधिकारी और सीडीओ को तत्काल इस मामले का संज्ञान लेकर ऐसे दागदार, भ्रम फैलाने वाले पदाधिकारियों और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ संयुक्त जांच कर तत्काल सख्त दंडात्मक कार्रवाई करनी चाहिए।

शिक्षक समाज की छवि को सरेआम धूमिल करने वाले इस तथाकथित पदाधिकारी की वीडियो, फोटो और उसके तमाम काले कारनामों का पूरा चिट्ठा साक्ष्यों के साथ जल्द ही जनता के सामने प्रसारित किया जाएगा।

नोट: इस संबंध में यदि संबंधित पक्ष या आरोपी का कोई भी बयान या स्पष्टीकरण सामने आता है, तो उसे भी निष्पक्षता के साथ प्रमुखता से प्रकाशित और प्रसारित किया जाएगा।